Why Can’t We Get Ahead in Our Life — हम अपनी जिंदगी में आगे क्यों नहीं बढ़ पाते

Why Can’t We Get Ahead in Our Life

https://www.lifedefinition.online/2021/03/why-cant-we-get-ahead-in-our-life.html

Why we are not able to move forward in our life because when we get some comfort with little happiness, then we think that now we do not have to work hard, just stay in this happiness and comfort. But it is forgotten that as the children grow older, the expenses of the family also keep increasing, for that, hard work has to be done. And to meet their needs, some money has to be collected.

This is the reason that when a difficult moment comes, we start crying because we do not have enough money to get out of that difficulty easily because we are not used to working hard. You will get whatever difficulty you face in life, you will be able to get out of it very easily. We try to understand it through a story.

Once both a guru and a disciple were passing through a village. He felt thirsty for water. He started looking around in search of water, he saw that there is a field. In which there was no crop, the entire land is lying like this and there was a small hut next to it. When both of them approached the hut to drink water, a man came out from there. Whose clothes were torn.

When he looked inside, he had three children with him and his wife as well. He was also wearing torn clothes. The Guru told the man to give us some water. That man made them both drink water. Then that man said that it is too late, you can rest in my house if you want.

The Guru said seeing his condition. How does your home live. Then he told that we have a buffalo that gives so much milk that we live. We get bread for two times. After that both the Guru and the disciple went to sleep. When it was midnight, the Guru picked up the disciple and said, “Come from here.” But before leaving, we have to bring that buffalo down from the rock. The disciple went to the square after hearing this. But he could not even refuse to talk to the Guru, so together they both dropped that buffalo from the rock. And went from there.

Now after a few years, when the disciple was worth something, he thought why should we repent of our mistake. He went to the man’s house with some money to help him financially, but when he reached there, he saw the fruit orchards there. In which there were lots of fruits, the fields were also waving well and there was a bungalow where the hut was built, the disciple thought that the person might have gone from here after selling all this land and house.Thinking that he had gone back to his car, that man came from the front and he said that you are the one who stayed in our house with his master.

The disciple did not recognize that man but that man had recognized the disciple, he told that when you went away that day, we do not know how our buffalo fell from the rock and died.

When the house started to be very difficult, I went to the forest and started bringing wood, selling the wood, I used to run the expenses of the house, the money that was left out of those money, I used to bring seeds in the money and put it in the land of God’s mercy. The crop was good and I got good money, then I started planting fruit plants and there was a lot of fruit on it.

Today, I am the biggest fruit merchant in the nearby village, if buffalo does not die on that day. So I probably would not have anything till today. Then that disciple came to know why my guru had made such an idea why that buffalo was dropped from the rock but there was still a question going on in the mind of that disciple, he asked the man. You could have done this work earlier also, why didn’t you do all this work earlier.

Then the man replied. That I was living by selling milk of the buffalo that I had, I was not having to work very hard and I had restricted my life to the extent that what I have now is that I have to look at my fields in front of that buffalo Was not only coming, it was good that the buffalo died and all this wealth came to me. Now a lot of cows and buffaloes are tied on that buffalo’s place. Now the way of living has changed.

It is not only about that one person for all of us. We also think that do a little hard work, do a little work and it will be done. It is not that we all have this much power. That we can live a happy life. If we work hard

Now we have to pay attention that we have not kept any such buffalo. If it is not allowing us to move forward in our life, then if it is so then cut its rope today and go ahead in our life. Because every person can do every single thing in this world.

Then let’s work hard leaving laziness and move forward in our life.

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हम अपनी जिंदगी में आगे क्यों नहीं बढ़ पाते क्योंकि हमें जब थोड़ा सा सुख हो आराम मिल जाता है तो हम सोच लेते हैं कि अब हमें मेहनत नहीं करनी बस इसी सुख और आराम में रहना है. लेकिन यह भूल जाते हैं कि जैसे जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं तो वैसे परिवार का खर्चा भी बढ़ता चला जाता है उसके लिए मेहनत करनी पड़ती है. और अपनी जरूरतों को पूरी करने के लिए कुछ धन भी इकट्ठा करना पड़ता है.

यही कारण है कि जब कोई मुश्किल घड़ी आती है तो हम रोना शुरू कर देते हैं क्योंकि हमारे पास इतना धन नहीं होता कि हम उस मुश्किल से आसानी में से निकल सके क्योंकि हम मेहनत करने के आदी नहीं होते अगर मेहनत करेंगे तो सुख आराम तो मिलेगा ही मिलेगा जीवन में जो भी कठिनाई आएगी उसमें से भी बड़ी आसानी से निकल पाएंगे. इसे एक कहानी के जरिए समझने की हम कोशिश करते हैं.
एक बार एक गुरु और शिष्य दोनों एक गांव से गुजर रहे थे. उन्हें पानी की प्यास लगी. वह पानी की तलाश में इधर-उधर देखने लगे उन्होंने देखा की एक खेत है. जिसमें कोई भी फसल नहीं हुई पूरी जमीन ऐसे ही पड़ी है और उसी के बगल में एक छोटी सी झोपड़ी थी. उन दोनों ने पानी पीने के लिए झोपड़ी का दरवाजा खटखटाया तो वहां से एक आदमी बाहर आया. जिसके कपड़े फटे हुए थे.

अंदर देखा तो उसके साथ उसके तीन बच्चे और उसकी पत्नी भी थी उन्होंने भी कपड़े फटे हुए ही पहने हुए थे. गुरु ने उस आदमी से बोला कि हमें थोड़ा पानी पिला दो. उस आदमी ने उन दोनों को पानी पिलाया. फिर वह आदमी बोला की रात बहुत हो चुकी है आप चाहो तो मेरे घर में आराम कर सकते हो.

गुरु ने उसकी हालत देखते हुए बोला. कि आपका घर का गुजारा कैसे होता है. तब उसने बताया कि हमारे पास एक भैंस है जो कि इतना दूध देती है जिससे हमारा गुजारा हो जाता है. हमें दो वक्त की रोटी मिल जाती है. उसके बाद गुरु और शिष्य दोनों सोने चले गए. जब आधी रात हुई तो गुरु ने शिष्य को उठाया और कहा यहां से चलो. लेकिन जाने से पहले हमें उस भैंस को चट्टान से नीचे गिराना होगा. शिष्य यह बात सुनकर चौक गया. लेकिन वह गुरु की बात को मना भी नहीं कर सकता था इसलिए उन दोनों ने मिलकर उस भैंस को चट्टान से गिरा दिया. और वहां से चले गए.

अब कुछ सालों बाद जब शिष्य कुछ लायक हुआ तो उसने सोचा कि क्यों ना हम अपनी गलती का पश्चाताप करें.उस आदमी के घर गया कुछ पैसे लेकर कि उसकी आर्थिक मदद कर दी जाए लेकिन जब वह वहां पहुंचा तो उसने देखा वहां तो फलों के बगीचे थे जिसमें बहुत सारे फल लगे हुए थे खेत भी अच्छे लहरा रहे थे और जहां पर झोपड़ी बनी हुई थी वहां पर एक बंगला बना हुआ था शिष्य ने सोचा कि शायद वह व्यक्ति यह सारी जमीन और घर बेचकर यहां से चला गया है यह सोचकर अपनी गाड़ी की तरफ वापिस गया ही था कि वह आदमी सामने से आ गया और उसने बोला कि आप तो वही है ना जो अपने गुरु के साथ हमारे घर में ठहरे थे.

शिष्य उस आदमी को पहचान नहीं पाया लेकिन उस आदमी ने शिष्य को पहचान लिया था उसने बताया कि जब आप चले गए उसी दिन पता नहीं कैसे हमारी भैंस चट्टान से गिरकर मर गई.

घर का गुजारा बड़ी मुश्किल से होने लगा तो मैं जंगल जाकर लकड़ियां लाने लगा लकड़ियों को बेचकर मुझे जो पैसे मिलते थे उसे घर का खर्च चलाता था उनमें से जो पैसे बच जाते थे उन पैसों के में बीज लाकर जमीन में लगा देता था भगवान की दया से फसल अच्छी हुई और मुझे अच्छा पैसा मिला तब मैंने फलों के पौधे लगाने शुरू किए और उस पर फल भी बहुत हुए.

आज यहां के आस-पास के गांव में मैं सबसे बड़ा फलों का व्यापारी हूं उस दिन अगर भैंस ना मरती. तो शायद आज तक मेरे पास कुछ ना होता. तब उस शिष्य को पता चला कि मेरे गुरु ने ऐसा विचार क्यों बनाया था क्यों उस भैंस को चट्टान से गिरा दिया था लेकिन अभी भी एक प्रश्न उस शिष्य के दिमाग में चल रहा था उसने उस आदमी से पूछा. यह काम आप पहले भी कर सकते थे आपने पहले यह सारा काम क्यों नहीं किया.

तब उस आदमी ने जवाब दिया. कि मेरे पास जो भैंस थी उस का दूध बेचकर मेरा गुजारा हो रहा था मुझे कुछ ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ रही थी और मैंने अपनी जिंदगी यहीं तक सीमित कर ली थी कि अब जो कुछ है बस यही है उस भैंस के आगे मुझे अपने खेत नजर ही नहीं आ रहे थे अच्छा हुआ वह भैंस मर गई और यह सारी धन-दौलत मेरे पास आ गया अब उस भैंस की जगह पर बहुत सारी गाय और भैंस बंधी हुई है. अब जीने का तरीका ही बदल गया है.

यह बात केवल उस एक व्यक्ति की नहीं है हम सब के लिए है. हम भी सोचते हैं कि थोड़ी सी मेहनत कर लो थोड़ा सा काम कर लो और गुजारा हो जाएगा. ऐसा नहीं है हम सब के पास इतनी ताकत है. कि हम एक खुशहाल जीवन जी सकते हैं. अगर हम मेहनत करे तो

अब हमें ध्यान देना है कि कहीं हमने तो कोई ऐसी भैंस नहीं पाल रखी. जो हमें हमारे जीवन में आगे नहीं बढ़ने दे रही अगर ऐसा है तो आज ही उसकी रस्सी काट दो. और अपने जीवन में आगे बढ़ो. क्योंकि हर एक व्यक्ति इस दुनिया में हर एक काम को कर सकता है.

तो फिर चलो आलस्य को छोड़कर मेहनत करते हैं और अपने जीवन में आगे बढ़ते हैं.

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धन्यवाद

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"God is not your bank account. He is not your means of provision. He is not the hope of your pay. He is not your life. He's not your god. He's your Father."

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