What is Humanity

Spiritual stories
5 min readFeb 22, 2021

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God has given understanding to humans, but not all animals and birds still live with love, yet they have compassion for each other. Never any animal or bird eat food alone, all together are eating food at one place and are drinking water. T But we forgot all this and let each other down. Forgot that we are human. Today God also wants us to remain human, that humanity should be alive in us so that we can help each other, we should have compassion for each other which is dying in us day by day. is. here is only one river in the forest where all animals drink water together.

Then let us create humanity inside us, because we are all human beings, we all have the quality of compassion. And when we show kindness to someone, we show our humanity, then that God does not leave any shortcoming. Let’s understand this through an example, a person who used to have some bread, he was often hungry and worked hard, but he used to get less bread. One day he cried a lot and shouted, “God, don’t I have enough bread Will I get hungry all my life? All this thing was heard by a monk who used to do devotion to God. He asked God that this person works very hard, yet why does it not get bread from it? In the fate of how much bread remained, God told that only 15 more breads but its lifespan is more, hence it gets less bread. So that monk said that you give it whole bread in one day, then later on you will see at least one day it will eat a meal He gave that 15 loaf to him, he was very hungry, he used to eat one loaf every day, he ate five loaves with great difficulty that day and five loaves he left empty at night 5 loaves he donated to someone else and this God It is the principle that he gives 10 times more when someone shows kindness to mankind, then he got 50 rotis the next day. After a few days, the same monk was passing through there, he saw that he kept very big shops, then the monk asked God how this happened, then God told that he has shown humanity as a quality of compassion It was inside that the quality began to be donated to so many people, who started getting it by multiplying it 10 times each time, so today, he is putting a storehouse.

आजकल के लोगों में इंसानियत मर चुकी है इंसान जिंदा जरूर घूम रहा है पर इंसानियत किसी में भी नहीं है. हर एक व्यक्ति हर एक दूसरे व्यक्ति को नीचा दिखाने में लगा हुआ है सोचता है कि मैं ही सबसे आगे हूं.

इसके लिए वह दूसरों की भावनाओं तक की कोई कदर नहीं करता. उसके सुख दुख को भी महसूस नहीं करता बिना देखे कि वह पहले कितना दुखी है उसे और दुख तकलीफ पहुंचाने पहुंच जाता है. भगवान ने हम सब को एक जैसा इसलिए बनाया था कि हम सब एक दूसरे के काम आए एक दूसरे की सहायता करें.

लेकिन हम लोग यह सब भूल गए और एक दूसरे को लगे नीचा दिखाने. भूल गए कि हम इंसान हैं. आज तो परमात्मा भी यह चाहता है कि हम इंसान ही बने रहे इंसानियत ही हमारे अंदर जिंदा हो जाए ताकि हम एक दूसरे की मदद कर सकें एक दूसरे के प्रति हमारे दिल में दया भाव हो जो दिन-ब-दिन हमारे अंदर खत्म होता जा रहा है.
भगवान ने इंसान को समझ दी है लेकिन जानवर और पक्षियों को नहीं फिर भी वह सब प्यार से रहते हैं फिर भी एक दूसरे के प्रति उनके दिल में दया भाव है कभी भी कोई जानवर या पक्षी अकेले खाना नहीं खाता सारे मिलकर एक जगह पर खाना खा रहे होते हैं पानी पी रहे होते हैं. जंगल में एक ही नदी होती है जहां सारे जानवर मिलकर पानी पीते हैं.

लेकिन एक इंसान है जिसे अगर थोड़ा सा भी कुछ पता चलता है कि यहां कुछ मिल रहा है तो कि यह जो कुछ भी है वह मैं ही ले जाऊं कोई और ना लेकर जाए. भगवान ने हमें समझ क्यों दी थी इंसान बनने के लिए.

तो फिर चलो हम अपने अंदर इंसानियत को पैदा करें क्योंकि हम सब इंसान हैं हम सबके अंदर दया का गुण है. और जब हम किसी पर दया करते हैं अपनी इंसानियत दिखाते हैं तो वह परमात्मा कोई कमी नहीं छोड़ता. एक उदाहरण के जरिए इसे समझते हैं एक व्यक्ति जिसे कभी कभी रोटी नसीब हुआ करती थी अक्सर वह भूखा ही रहता था मेहनत भी खूब करता था पर उसे रोटी कम मिलती थी एक दिन वह खूब रोया और चिल्लाया कि भगवान क्या मुझे पेट भर कभी रोटी नहीं मिलेगी क्या मैं सारी उम्र भूखा ही रहूंगा. यह सब चीज एक साधु सुन रहा था जो भगवान की भक्ति करता था उसने भगवान से पूछा कि यह इंसान खूब मेहनत करता है फिर भी इस से रोटी क्यों नहीं मिलती तो पता चला कि उस के नसीब में बहुत कम रोटियां है तो साधु ने पूछा कि कितनी रोटी रह गई इसकी किस्मत में तो भगवान ने बताया कि सिर्फ और सिर्फ 15 रोटी लेकिन इसकी उम्र ज्यादा है इसलिए इसे कम रोटी मिलती है. तो उस साधु ने बोला आप इसे पूरी रोटी एक ही दिन में दे दो बाकी बाद में देखेंगे कम से कम एक दिन तो यह पेट भर खाना खाएगा उन्होंने वह 15 रोटी उसको दे दी उसको भूख बहुत लगी थी रोज एक रोटी खाता था वह उस दिन बड़ी मुश्किल से उसने पांच रोटी खाई और पांच रोटी उसने रात को खाली बाकी बची 5 रोटी उसने दान कर दी किसी और को खिला दी और यह भगवान का असूल है कि वह 10 गुना ज्यादा देता है जब कोई दया करता है इंसानियत दिखाता है उसे तो अगले दिन उसे 50 रोटी मिली उसने फिर वही 10 खाई और उसने 40 फिर बांट दी ऐसे करते करते उसकी किस्मत में बहुत सारी रोटियां लिखी गई कुछ दिनों के बाद वही साधु वहां से गुजर रहा था उसने देखा कि उसने तो बहुत बड़े-बड़े भंडारे लगा रखे फिर उस साधु ने भगवान से पूछा कि यह कैसे हुआ तो भगवान ने बताया कि इसने इंसानियत दिखाई है इसके अंदर जो दया भाव का गुण था इसके अंदर वह गुण परगट हुआ इतने लोगों को दान करना शुरू किया जो हर बार इसे 10 गुणा करके मिलना लगा इसलिए आज आ भंडारे लगा रहा है.

कहने का भाव है कि हम जितनी मदद करेंगे उतनी मदद वह भगवान हमारी करेगा और यह मदद सिर्फ और सिर्फ वही कर सकता है जिसके अंदर इंसानियत जिंदा है जिसके अंदर इंसानियत मर चुकी है वह कभी किसी की मदद नहीं कर सकता वह सिर्फ और सिर्फ अपने बारे में ही सोच सकता है.

हम सभी मिल बांट कर खा सकते हैं एक दूसरे की मदद हम लोग कर सकते हैं. तो चलो फिर आज से इंसानियत दिखाएं

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Originally published at https://www.lifedefinition.online.

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"God is not your bank account. He is not your means of provision. He is not the hope of your pay. He is not your life. He's not your god. He's your Father."