Thank God — भगवान तेरा शुक्र है

Thank God

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People are often disturbed and surrounded by some problem. And all the time, blame God that whatever has gone wrong with me. God has done that. When something good happens, then we say that I have done all this work. And when it is bad, God starts cursing it. When does bad happen to us When we forget that God only.We do not even thank the God who is giving us everything. And we get so busy inside what he has given us. That forget that giver. Never thank him.

The biggest weakness of man is that he forgets God first. Whereas we should always remember that God, whether he gives us happiness or sorrow, we should always thank him. And all the time we should say the same thing that God is thankful to you. Elder elders used to explain that when we start saying that I have nothing, I am very sad.So somewhere this thing comes true. So it should be said all the time that thank God I am happy, then somewhere this thing starts to come true. So we have to thank him all the time. Let’s try to understand this thing through a story.

It is from a long time ago. There was a bird that lived in the desert. He was very sick and the wings of that poor person were also broken. He had nothing to eat and drink and no place to live. One day the pigeon was passing by. The sick and the bird saw the pigeon and stopped it. And started asking where are you going. The pigeon said that a very knowledgeable monk has come a little bit away from here. Going to see him Sick bird told him you will do one of my work. The pigeon said yes. The sick bird said to ask the monk when my pain will end. The pigeon said yes, okay I will ask, the pigeon started speaking to the monk after speaking so much.

When the pigeon reached another village, he asked the monk that a sick bird was found on the way to me. He told me to ask Sadhu Maharaj about my suffering. The sadhu said that for the next seven years, grief is written in the same way in the life of that bird, he will have to bear this pain for the next seven years. Till then there is no happiness in his life. Hearing this, the pigeon said, Maharaj, if I will tell him this.Then he will get more upset. Tell me some solution for what I should tell him. Sadhu Maharaj said. You speak to him. Whenever you have any sorrow or pain, thank God for speaking only one thing.

When the pigeon met the sick bird on his return, he gave him the message of sage After a few days, the pigeon passed again from there and see what. Now that the wings of that bird had come out. The bird was very happy. A small pond was also built nearby and a plant was also planted there. And there were many birds also. The pigeon was very surprised as the monk said. There is no happiness in the life of a bird for seven years. Then how did this happen? The pigeon reached the monk looking for him. And asked the monk how this happened. The monk said that it is absolutely true that there was no happiness in the life of the bird for seven years. But the bird started speaking the same thing in every situation, thank God.

Every time he suffered, he said the same thing that God is thankful to you. Because of this, the misery that he had to suffer for seven years was cut off in seven days. My life changed when I heard this story. I felt a lot of change in my thinking and acceptance. And I adopted it in my life, no matter what grief or suffering we have, we have to say only one thing. God is thankful to you.

In this world where humans do not work for human beings, there is only God and there is no need for us to go anywhere, that God is with us and he is helping us all the time, so in every situation we should thank him, That God is thankful to you.

In this world, every person puts his full strength. To get out of any problem and at that time the people of this world also leave us. So, it comes out of the mouth of a human being that there is no one except God. Now when we have no one except that God, then why do we not thank him, we have to thank him with every breath that thank you is thankful to you.

Then let us thank God for not saying good and bad and let happiness fill your life.

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Thank you

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भगवान तेरा शुक्र है

लोग अक्सर परेशान रहते हैं किसी ना किसी समस्या से घिरे रहते हैं. और हर समय भगवान को ही दोष देते हैं कि जो कुछ भी मेरे साथ गलत हुआ है. वह भगवान ने किया है. जब कुछ अच्छा होता है तब तो हम कहते हैं कि यह सारा काम मैंने किया है. और जब बुरा होता है तो भगवान को कोसने लग जाते हैं. हमारे साथ बुरा होता कब है. जब हम उस भगवान को ही भूल जाते हैं. जो भगवान हमें सब कुछ दे रहा है उसका शुक्रिया अदा तक नहीं करते. और जो कुछ उसने हमें दिया है हम उसी के अंदर इतने व्यस्त हो जाते हैं. कि उस देने वाले को ही भूल जाते हैं. कभी भी उस का शुक्रिया अदा नहीं करते.

इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि वह सबसे पहले भगवान को ही भूलता है. जबकि हमें तो हमेशा उस भगवान को याद रखना चाहिए वह चाहे हमें सुख दे या दुख दे हमें हमेशा उसका शुक्रिया अदा करना चाहिए. और हर समय हमें एक ही बात बोलनी चाहिए कि भगवान तेरा शुक्र है. बड़े बुजुर्ग समझाया करते थे कि जब हम यह कहना शुरू कर देते हैं कि मेरे पास कुछ भी नहीं मैं बहुत दुखी हूं. तो कहीं ना कहीं यह बात सच हो जाती है. इसलिए हर समय यह कहना चाहिए कि भगवान का शुक्र है मैं खुश हूं तो कहीं ना कहीं यह बात सच होने लगती है. इसलिए हर समय हमें उस का शुक्रिया अदा करना है. आओ इस बात को एक कहानी के जरिए समझने की कोशिश करते हैं.

बहुत पहले की बात है. एक पक्षी था जो रेगिस्तान में रहता था. वह बहुत ही बीमार था उस बेचारे के पंख भी टूट चुके थे. खाने पीने के लिए उसके पास कुछ भी नहीं था और रहने के लिए जगह भी नहीं थी. दिने एक दिन कबूतर उधर से गुजर रहा था. उस बीमार और पक्षी ने कबूतर को देखा और उसको रोका. और से पूछने लगा तुम कहां जा रहे हो. कबूतर ने कहा यहां से थोड़ी दूर एक बहुत ही ज्ञानी साधु आया हुआ है उसके दर्शन करने जा रहा हूं. बीमार पक्षी उसको बोला मेरा एक काम करोगे. कबूतर ने बोला हां कर दूंगा. बीमार पक्षी ने कहा उस साधु से पूछना कि मेरी पीड़ा कब खत्म होगी. कबूतर बोला हां ठीक है मैं पूछ लूंगा कबूतर इतना बोल कर साधु के दर्शन करने चल पड़ा.

कबूतर दूसरे गांव पहुंचा वहां उसने साधु से पूछा कि एक बीमार पक्षी मिला था मुझे रास्ते में. उसने मुझसे कहा था साधु महाराज से मेरी पीड़ा के बारे में पूछना. साधु बोला अगले सात वर्ष तक उस पक्षी के जीवन में इसी तरह दुख ही दुख लिखा हुआ है उसे अगले सात वर्षों तक यह पीड़ा झेलनी पड़ेगी. तब तक उसके जीवन में कोई खुशी नहीं है. यह सुनकर कबूतर बोला महाराज अगर मैं यह बात उसको बताऊंगा तो वह और ज्यादा परेशान हो जाएगा. मुझे इसका कोई उपाय बताओ कि मैं उसको क्या बोलूं. साधु महाराज बोले. तुम उसको बोलना. जब भी तुम्हें कोई दुख या पीड़ा हो सिर्फ एक ही बात बोलना शुक्र है भगवान का.

वापसी पर कबूतर उस बीमार पक्षी से मिला तो उसने उसको साधु का संदेश दिया. कुछ दिनों के बाद कबूतर वहां से फिर गुजरा और क्या देखता है. कि अब उस पक्षी के पंख निकल आए थे. पक्षी बहुत खुश था. पास में छोटा सा तालाब भी बना हुआ था और वहां एक पौधा भी लगा हुआ था. और वहां बहुत सारे पक्षी भी आ गए थे. कबूतर को बहुत ही अचरज हुआ क्योंकि साधु ने कहा था. सात वर्ष तक पक्षी के जीवन में कोई खुशी नहीं है. फिर यह कैसे हो गया. कबूतर ढूंढता ढूंढता साधु के पास पहुंचा. और साधु से पूछा यह सब कैसे हो गया. साधु बोला बिल्कुल सच है पक्षी की जिंदगी में सात वर्ष तक कोई भी खुशी नहीं थी. लेकिन पक्षी हर स्थिति में एक ही बात बोलने लगा भगवान तेरा शुक्र है.

उसे हर बार चाहे जितना भी दुख आया उसने एक ही बात बोली कि भगवान तेरा शुक्र है. इस वजह से जो उसने दुख सात वर्ष तक भोगना था उसका वह दुख सात दिन में ही कट गया. जब मैंने यह कहानी सुनी तो मेरा जीवन ही बदल गया. मैंने अपने सोचने समझने और स्वीकार करने में काफी परिवर्तन महसूस किया. और मैंने इसको अपने जीवन में अपना लिया चाहे हमें कोई भी दुख या तकलीफ आए हमने सिर्फ एक ही बात बोलनी है. भगवान तेरा शुक्र है.

इस दुनिया में जहां इंसान इंसान के काम नहीं आता वहां सिर्फ और सिर्फ भगवान ही काम आता है हम कहीं पर भी चले जाए वह भगवान हमारे साथ है और वह हमारी हर समय मदद कर रहा है इसलिए हर हाल में हमें उसका शुक्रिया अदा करना चाहिए, कि भगवान तेरा शुक्र है.

इस दुनिया में हर एक इंसान अपनी पूरी ताकत लगा देता है. किसी भी समस्या से निकलने के लिए और उस समय यह संसार के लोग भी हमारा साथ छोड़ देते हैं. तो इंसान के मुंह से अपने आप ही निकलता है कि मेरा तो भगवान के सिवाय कोई है ही नहीं. अब जब हमारा उस भगवान के सिवाय कोई नहीं है तो फिर क्यों हम उस का शुक्रिया अदा नहीं करते हमें तो हर एक सांस के साथ उसका शुक्रिया अदा करना है कि शुक्र है तेरा शुक्र है तेरा.

तो फिर चलो भगवान को बुरा भला ना कह कर उसका शुक्रिया अदा करें और अपने जीवन में खुशियां ही खुशियां भर ले.
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धन्यवाद

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"God is not your bank account. He is not your means of provision. He is not the hope of your pay. He is not your life. He's not your god. He's your Father."

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