It Makes A Difference — उसको तो फ़र्क पड़ता है

It Makes A Difference

https://www.lifedefinition.online/2021/03/it-makes-difference.html

We often think of ourselves always, never think of people, we always do the same thing in which we are good, we never think about the well being of others, because our scope of thinking is very small We are limited to ourselves and we feel that maybe no one is concerned with helping us or not, but it makes a difference to everyone.

The only person who comes to us for help is the person who has some hope from us that this person can do something good for me and when we are not able to do anything good for him or refuse to help him. If it is, then it makes a lot of difference.

And if we help him, he is very happy. His life also makes a difference because what he thought is somewhere.

He fulfills his expectation. And we do not know how much trouble he is in for which he has come to ask for help from us, if he will help, then we will like him, we will also like to tell the story of a small child.

Once, after a storm, thousands of fish were dying on the sands, torturing them on the shore! Seeing this terrible situation, a 6-year-old child living nearby could not keep up, and he picked up one fish and threw it back into the sea! Seeing this, her mother said, the son is in lakhs of fish, you will save the lives of some, on hearing this, the child increased his pace. Mother again said, stay the son, it doesn’t matter! The child started crying loudly and throwing a fish into the sea, the mother said loudly, “It does matter”

Mother picks up the second fish and then says, “It does matter” Mother! Mother hugged the child! If possible, always try to give people hope and hope, do not know when someone’s life will change because of you!

Because you don’t mind.

“He does matter” ………

Our one small effort does not know how many lives can be saved, as if the child did not save the life of all the fish from the youngest, but some fish survived.

Similarly, if the mother did not stop the child and would support the child, then many other fish could have survived. Similarly, if we help someone, then it is a good thing and if we do not, then we should increase our expectation of the person who is helping us, then we should increase our expectation. It should inspire us to move forward by not pulling backwards.

So then let’s not think about ourselves and think about everyone and help people as much as possible because helping us makes a difference to us no matter what.

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Thank you

https://www.lifedefinition.online/2021/03/it-makes-difference.html

हम लोग अक्सर अपने बारे में ही हमेशा सोचते हैं लोगों के बारे में कभी भी नहीं सोचते हम हमेशा वही काम करते हैं जिसमें हमारी भलाई हो हम दूसरों की भलाई के बारे में कभी सोच ही नहीं पाते वह इसलिए क्योंकि हमारे सोचने का दायरा बहुत छोटा सा है हम अपने आप तक ही सीमित रह जाते हैं और हमें लगता है कि शायद किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता हमारी मदद करने से या ना करने से लेकिन फर्क सबको पड़ता है.

हमारे पास मदद के लिए सिर्फ और सिर्फ वही व्यक्ति आता है जिसको हम से कुछ उम्मीद होती है कि यह व्यक्ति मेरे लिए कुछ अच्छा कर सकता है और जब हम उसके लिए कुछ अच्छा नहीं कर पाते हैं या फिर उसकी मदद करने से उसे मना कर देते हैं तो उसको बहुत फर्क पड़ता है.

और अगर हम उसकी मदद कर देते हैं वह खुश तो बहुत होता है. उसकी जिंदगी में भी फर्क पड़ता है क्योंकि जो उसने सोचा होता है कहीं ना कहीं.

वह उसकी उम्मीद पूरी हो जाती है. और हम नहीं जानते कि वह कितनी बड़ी मुसीबत में फंसा हुआ है जिसके लिए वह हम से मदद मांगने के लिए आया है मदद करेंगे तो उसको तो अच्छा लगेगा हमें भी अच्छा लगेगा एक छोटे से बच्चे की कहानी बताती हूं.

एक बार समुद्री तूफ़ान के बाद हजारों लाखों मछलियाँ किनारे पर रेत पर तड़प तड़प कर मर रहीँ थीं ! इस भयानक स्थिति को देखकर पास में रहने वाले एक 6 वर्ष के बच्चे से रहा नहीं गया, और वह एक एक मछली उठा कर समुद्र में वापस फेकनें लगा ! यह देख कर उसकी माँ बोली, बेटा मछलियां लाखों की संख्या में है , तू कितनों की जान बचाएगा ,यह सुनकर बच्चे ने अपनी गति और बढ़ा दी. माँ फिर बोली बेटा रहनें दे कोई फ़र्क नहीं पड़ता ! बच्चा जोर जोर से रोने लगा और एक मछली को समुद्र में फेकतें हुए जोर से बोला माँ “इसको तो फ़र्क पड़ता है”

दूसरी मछली को उठाता और फिर बोलता माँ “इसको तो फ़र्क पड़ता हैं” ! माँ ने बच्चे को सीने से लगा लिया !
हो सके तो लोगों को हमेशा होंसला और उम्मीद देनें की कोशिश करो, न जानें कब आपकी वजह से किसी की जिन्दगी बदल जाए!

क्योंकि आपको कोई फ़र्क नहीं पड़ता पर .
“उसको तो फ़र्क पड़ता है”………
हमारी एक छोटी सी कोशिश पता नहीं कितनी जिंदगियां बचा सकती है जैसे से नन्हे से बच्चे ने चाहे सारी मछलियों की जान नहीं बचाई लेकिन कुछ मछलियां तो बच गई.

इसी तरह अगर मां बच्चे को ना रोक कर बच्चे का साथ देती तो और काफी सारी मछलियां बच सकती थी. इसी तरह हम अगर किसी की मदद करते हैं तो अच्छी बात है और अगर नहीं करते तो जो मदद कर रहा होता है उसका तो हौसला हमें बढ़ाना चाहिए उसकी उम्मीद तो हमें बढ़ानी चाहिए. उसे हमें पीछे की तरफ ना खींचकर आगे की तरफ बढ़ने की प्रेरणा देनी चाहिए.

तो फिर चलो अपने बारे में ना सोच कर सब के बारे में सोचते हैं और जितनी ज्यादा हो सकती है लोगों की मदद करते हैं क्योंकि हमारी मदद करने से उसको तो फर्क पड़ता है हमें चाहे फर्क पड़े ना पड़े.

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धन्यवाद

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"God is not your bank account. He is not your means of provision. He is not the hope of your pay. He is not your life. He's not your god. He's your Father."

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