विश्वास क्या है

Spiritual stories
5 min readApr 11, 2021
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विश्वास बेशक एक छोटा सा शब्द है लेकिन इसको कमाने में पूरा जीवन बीत जाता है. और जब हम किसी पर विश्वास करते हैं तो हमारे लिए वही सब कुछ होता है. और जब हमारा विश्वास टूटता है तो हम दुनिया के सबसे मजबूर इंसान अपने आप को समझते हैं. लेकिन अगर हम विश्वास करें तो पूर्ण तरीके से उस पर विश्वास करें.

एक बार सड़क के किनारे पेड़ के नीचे कोई डाकू बैठा हुआ था वहां एक पंडित आया और सड़क के किनारे एक ढाबे के पास बैठ गया लोग जल्दी से उसके लिए एक आरामदायक कुर्सी लेकर आए और उसे चाय नाश्ता दिया. अचानक कुछ लोग हर हड़बढ़ाते हुए भागते भागते उसकी ओर आ गए पंडित ने इस बौखलाहट का कारण पूछा गांव के मुखिया ने कहा दूसरे गांव से एक आदमी आया है जो दावा कर रहा है कि परमात्मा सुई के छेद में से गुजर सकता है. पंडित मुस्कुराया और बड़ी अकड़ से बोला के यह सब बेवकूफ है भला परमात्मा सुई के छेद में से कैसे गुजर सकता है यह देहाती कोई पागल लगता है. उसकी तरफ ध्यान मत दो.
भीड़ धीरे-धीरे चुपचाप से हटने लगी तभी पेड़ के नीचे बैठे हुए डाकू जिसने अपना चेहरा टोपी से ढका हुआ था धीरे से बोला परमात्मा तो कुछ भी कर सकता है.
इसे कहते हैं विश्वास!
अपने ज्ञान और बुद्धि के बावजूद पंडित का विश्वास पक्का नहीं था कि परमात्मा सर्वशक्तिमान है जबकि पाप कर्म में लिप्त होने पर भी डाकू को यह अहसास था कि परमात्मा सर्वशक्तिमान है कहां जाता है कभी-कभी कोई पापी जीत जाता है! जहां कोई साधु चूक जाता है.
विश्वास एक ऐसा भरोसा है जिसे इंद्रियों के अनुभव नहीं किया जा सकता. और जिसे हमारा मन समझ नहीं पाता विश्वास के मायने है. उस बात पर यकीन करना जिसे हम साबित नहीं कर सकते. विश्वास से मिलने वाली शक्ति ही हमें कामयाब रखती है. अगर सब कुछ ठीक चल रहा है तो जिंदगी की रो में बह रहे हैं लेकिन जब हमें लगता है कि सब कुछ हमारे विरोध मे हो रहा है तब संतुलन बनाए रखने के लिए हमें कुछ और भी चाहिए. उस समय विश्वास हमारा आधार बनता है विश्वास में इतनी ताकत है कि मुश्किल से मुश्किल काम भी पूरा हो जाता है.
जीवन में आने वाले अलग-अलग हालात में अगर हमारा विश्वास डोल जाता है तो वह विश्वास नहीं है. जिस तरह शादी के वक्त कसमें लेते हुए हर हालात में साथ निभाने का वादा किया जाता है चाहे बीमारी की हालात हो, या सेहत अच्छी हो, हालात अच्छे हो, या फिर बुरे उसी तरह विश्वास में भी यही स्थिति है जीवन में चाहे कैसी भी मुश्किल घड़ी आए हमारा विश्वास डगमगाना नहीं चाहिए!
अपने आसपास ध्यान दें तो हमें हर तरफ परमात्मा के चमत्कार ही चमत्कार नजर आएंगे.
प्रकाश और अंधकार की हर घड़ी चमत्कार नहीं है क्या, यह चमत्कार नहीं है कि हर इंसान का चेहरा एक दूसरे से अलग है..
क्या यह चमत्कार नहीं है कि किसी भी देश में दुनिया में किसी भी कोने में किसी भी जाति धर्म या नस्ल में पैदा होने वाले बच्चे मुंह से पहला शब्द मां मां ही निकलता हैं.
रंग बिरंगे इंद्रधनुष का दिखाई देना क्या चमत्कार नहीं है. विज्ञान और तकनीकी की उन्नति इन चमत्कार के सामने कुछ भी नहीं है. विज्ञान मनुष्य को चांद चांद तक भले ही ले जाए लेकिन वह एक नया चांद नहीं बना सकता ना ही यह एक और सूरज बना सकता है. यह जानवरों का प्रतिरूप भले ही कर ले लेकिन असली जानवर नहीं बना सकता. चमत्कार सिर्फ हमारे विश्वास की वजह से होते हैं. जहां विश्वास नहीं वहां चमत्कार नहीं हो सकते. जहां विश्वास है वहां हमारे अपने आसपास चमत्कार ही चमत्कार दिखाई देते हैं विश्वास और सत्य एक ही है. परमात्मा के नजरिए से यह सत्य है और हमारे नजरिए से विश्वास.
हजरत निजामुद्दीन औलिया का किस्सा इस बात का बिल्कुल सही उदाहरण है. उसके 22 शिष्य थे. और हर शिष्य उसका वारिस बनना चाहता था. यह देखने के लिए कि उस में से सबसे सच्चा शिष्य कौन है. हजरत निजामुद्दीन ने उसका इम्तिहान लेने का फैसला किया.

एक दिन बाजार में घूमते हुए वह उस इलाके में चला गया जहां वेश्याओं के कोठे थे सभी देखने वालों को हैरानी में डालते हुए हजरत निजामुद्दीन एक वेश्या के कोठे के अंदर चले गए. और अपने शिष्यों से बाहर ठहरने के लिए कहा शिष्य हक्के बक्के के रह गए. और सोचने लगे कि उनके मुर्शीद ऐसी जगह पर क्या कर रहे हैं.
हजरत निजामुद्दीन ने वहां की मालकिन से कहा कि उन्हें एक रात के लिए कमरा चाहिए और उसके लिए थोड़ा भोजन और शरबत भी भेज दिया जाए शिष्य बाहर से देख रहे थे कि उनके कमरे में खाने पीने का सामान ले जा रहे हैं उनके मन में बहुत बुरे ख्याल आने लगे और वह बड़े निराश हो गए. वे सोचने लगे कि उनके मुर्शीद खाने-पीने और वैश्या के पास जाने जैसी हरकतें करके उनका विश्वास कैसे तोड़ सकते हैं? जैसे-जैसे रात बीत रही थी. एक-एक करके उनके शिष्य निराश होकर वापस जाने लगे. सुबह होने पर जब मुर्शीद नीचे आए तो सिर्फ एक ही शिष्य उनका इंतजार कर रहा था.
जब मुर्शीद ने पूछा कि वह दूसरों की तरह चला क्यों नहीं गया तो शिष्य ने जवाब दिया मुर्शीद मेरा ठिकाना तो आपके चरणों में है.
केवल एक ही शिष्य का गुरु में विश्वास नहीं डगमगआया केवल उसी को अपने मुर्शीद पर पूरा भरोसा था वह शिष्य था अमीर खुसरो, जिसके कलाम में अपने मुर्शीद हजरत निजामुद्दीन औलिया के प्रति प्रेम ही प्रेम भरा है. उसके कलाम के कारण हम आज भी उन्हें याद करते हैं. क्या हमें विश्वास है या नहीं
हम अपनी शंकाएं इतनी ज्यादा बढ़ा लेते हैं कि यह हमारे ऊपर हावी हो जाती है यह जरूरी नहीं है कि हालात वैसे ही हो जैसे दिखाई देते हैं शिष्य के रूप में हमें कई बार ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है जो असल में भ्रम या गलतफहमी ही होती है. लेकिन उस समय वही सही दिखाई देता है.
अगर रूहानी तरक्की ना होने के कारण मन में ठहराव नहीं है तो हमें मुसीबतों परेशानियों दुविधाओं का और अपनी कमजोरियों का सामना करना पड़ता है! अगर हम इन रुकावटें के आगे घुटने टेक देते हैं. तो यह रुकावटें हमें सतगुरु के अमर उपदेश की जरूरत और उनकी अहमियत को समझने नहीं देगी. सत्य की प्रति के लिए हमें ने जो वचन दिया है हमारा उतावलापन हमें उनसे दूर कर देता है.

हमें हमेशा जिस भी रास्ते पर आगे बढ़ना है पूर्ण विश्वास के साथ आगे बढ़ना है. ताकि हम जिस भी रास्ते पर चले उसमें हमें सफलता हासिल हो.

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धन्यवाद

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"God is not your bank account. He is not your means of provision. He is not the hope of your pay. He is not your life. He's not your god. He's your Father."