मौत का डर

मौत का डर, मौत से डर हम सभी को लगता है | हम में से कोई भी मरना नहीं चाहता | दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जिनको मौत का नाम सुनते ही डर लगने लगता है | जिस दिन इंसान दुनिया में पैदा होता है उसी दिन से वह मरने की राह पर चल पड़ता है | यही कुदरत का नियम है | अब जो चीज पहले से ही तय हैं उस से डरना क्या | मौत के डर के बारे में मौलाना रूम बहुत अच्छी तरह से समझाते हैं | आइए हम भी इस बात को समझने की कोशिश करते हैं और अपने अंदर से मौत का डर निकालते हैं |

मौलाना रूम ने कहा है : तुम्हारा मौत से डरना असल में आप आप से डरना है, सोचो कि वह क्या चीज है जिससे तुम भाग रहे हैं |”

हम मौत से इसलिए डरते हैं क्योंकि हम उसके बारे में कुछ नहीं जानते | हम किसी के अंतिम संस्कार में जाते हैं और वहां लोगों को शोक मनाते हुए देखते हैं ; दिवंगत व्यक्ति के लिए शोक मनाने की इस रीति
द्वारा असल में हम अपने सदमे को सहन करते हैं | हमारी उस परम सत्य को जानने की हमेशा गहरी इच्छा रही है लेकिन उस परम सत्य को जानने का डर भी हमेशा जिंदगी में बना रहता है |

हमारी हर सांस हमें मौत के नजदीक ले जा रही है | हर सप्ताह, हर महीना, हर साल जो गुजर रहा है हमें याद दिलाता है कि मौत हमारा दरवाजा खटखटा रही है | हम बड़ी खुशी खुशी जन्मदिन मनाते हैं लेकिन जन्मदिन हमें मौत के नजदीक ले जा रहा है, इसलिए असल में हमें अपनी मौत का जश्न मनाना चाहिए | हम ऐसी जिंदगी पर भरोसा रख कर बैठे हैं जो सांस लेने और छोड़ने जैसी अनिश्चित चीज के सहारे टिकी हुई है, जहां हमारी कोई भी सांस आखिरी सांस हो सकती है |

जब हम सो रहे होते हैं तो हमें यह डर नहीं होता कि हम बेहोश हो जाएंगे: हम नींद को आराम पाने का जरिया मानते हैं, हमें नींद अच्छी लगती है क्योंकि इसमें शांति और सुकून मिलता है और हम मानते हैं कि सोते वक्त हम ऐसी अवस्था में पहुंच जाते हैं जहां हम निश्चित हो जाते हैं | मौत के बारे में भी हमें इसी तरह सोचना चाहिए | अगर हम जीते जी मौत का अनुभव कर सकते या इसे जान पाते तो यकीनन हमारा डर दूर हो जाता | इस भेद से पर्दा हटाया जा सकता है | यह अनजानी चीज जानी पहचानी हो सकती है, इसलिए डरने की जरूरत ही नहीं है | जब हम मौत की बात करते हैं तो हममें से कोई तो ऐसी हरकतें करने लगते हैं जैसे बच्चे अंधेरे में करते हैं | जैसे डर को दूर करने के लिए बच्चे बत्ती जला लेते हैं, वैसे ही मौत के डर को दूर करने के लिए हमें अपने आंतरिक प्रकाश का सहारा ले सकते हैं | जैसा की बाइबिल में कहा गया है, अगर तुम एक आंख वाले बन जाओ तो तुम्हारा सारा शरीर प्रकाश से भर जाएगा |

जब हम परमात्मा की भक्ति करते हुए पूरी तरह एकाग्र हो जाते हैं तब हम “ एक आंख वाले” बन सकते हैं, हमारे अंतर की रूहानी “ आंख” अंदर देख सकती है कि हमारा सारा वजूद आंतरिक प्रकाश से भर जाता है | यह प्रकाश हमें आंतरिक ज्ञान देता है यानी “ तुम्हारा सारा शरीर प्रकाश से भर जाएगा”| उस प्रकाश, उस आंतरिक ज्ञान से हमारे सारे डर दूर हो जाते हैं और हमारे अंदर देहरा विश्वास पैदा हो जाता है |

एक जापानी सिपाही और उसकी पत्नी के बारे में एक किस्सा है | वह एक छोटी सी नाम में किसी टापू की तरफ जा रहे थे | अचानक जोर का तूफान आया और उनकी नाव डोलने लगी | उन्हें खतरा था कि नाव उलट जाएगी और वह डूब जाएंगे | पत्नी बहुत घबरा गई | वह कांपने लगी और रोते रोते पति की आगे गिड़गिड़ाने लगी कि वह उन्हें बचा ले | लेकिन पति बस चुपचाप बैठा रहा | घबराकर उसने पति को पुकारा, “ क्या तुम हमें ऐसे ही डूबने दोगे ? तुम कुछ करोगे नहीं ?”

सिपाही ने चुपचाप म्यान से तलवार निकाली और उसे अपनी पत्नी की गर्दन पर इस तरह रख दी जैसे कि अभी उसका गला काट देगा |
यह देखकर पत्नी हंसने लगे |

सिपाही ने पत्नी से पूछा, “ तुम हंस क्यों रही हो ? तलवार की धार बड़ी तेज है, एक ही बार से तुम्हारा गला काट डालेगी |”

इस पर पत्नी ने पूरे विश्वास से कहा, तलवार भले ही खतरनाक हो लेकिन यह तुम्हारे हाथ में हैं | मेरे लिए इतना ही काफी है | मुझे तुम पर भरोसा है, इसलिए मुझे कोई डर नहीं है |”

सिपाही ने तलवार वापस म्यान में रखते हुए कहा, यहां तलवार मेरे परमात्मा के हाथ में है, इसीलिए मुझे कोई डर नहीं है |” उसका विश्वास नहीं डगमगआया |

हमें अपनी जिंदगी का हर दिन इसी तरह जीना है जैसे हम मौत का सामना करते हुए तैयारी कर रहे हो क्योंकि मौत अटल है | लेकिन मौत हमारे लिए कोई अनजान चीज नहीं होनी चाहिए | अगर हमने मौत के लिए तैयारी की है तो हम कहीं भी, कभी भी मौत का सामना कर सकते हैं |

यह तैयारी परमात्मा की भक्ति है जो हमारी जिंदगी का हिस्सा बन जाना चाहिए |

अगर ये लेख आपको अच्छा लगे तो हर व्यक्ति तक जरुर भेजे।*_

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धन्यवाद

Originally published at https://www.spiritualstories.online.

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