मनुष्य जीवन का रहस्य

मनुष्य जन्म एक रहस्य ही तो है जिसके बारे में आज तक कोई नहीं जान पाया कि हमें यह मनुष्य जन्म क्यों मिलता है और इसका मकसद क्या है | इस दुनिया में बहुत से ऋषि मुनि आए हैं जिन्होंने हमें मनुष्य जन्म के रहस्य को समझाने की कोशिश की है | हम लोग उनकी बात सुन तो लेते हैं लेकिन समझते नहीं | हमें यह मनुष्य जन्म 84 लाख योनियों के बाद मिलता है |

मनुष्य जीवन का सिर्फ एक ही मकसद है, परमात्मा की प्राप्ति | हमें 84 लाख योनियों में से गुजरने के बाद मनुष्य जीवन प्राप्त होता है | और हम लोग इतनी मुश्किल से प्राप्त हुए इस मनुष्य जीवन को यूं ही गवा देते हैं | हम पल-पल मौत की तरफ जा रहे होते हैं लेकिन उसके बावजूद अपनी मौत को भूल कर दुनिया की रंगीनियों में डूबे रहते हैं

हमें परमात्मा की प्राप्ति क्यों नहीं होती |यह मैं आपको एक एक बहुत ही रहस्यमई कहानी कहानी के जरिए बताने की कोशिश करती हूं आप भी कृपया ध्यान से इस कहानी को पढ़े और समझे |

एक राजा सुबह सवेरे अपने घोड़े पर सवार होकर गांव गांव में होता हुआ दूर जंगल में चला गया | कई घंटे की सवारी करते-करते वह एक घने जंगल में इतनी दूर चला गया कि अब और आगे जाना संभव नहीं था | अपने घोड़े की लगाम पकड़े जब उसने इधर उधर देखा तो वहां सामने एक शेर को आते देखकर भयभीत हो गया | वह अपने घोड़े से छलांग लगाकर, नजदीक के पेड़ पर चढ़कर उसकी एक टहनी पर बैठ गया | शेर भी उसी पेड़ के पास इस ताक में बैठ गया कि कब राजा नीचे उतरे और वह उसे खा जाए | यह भापकर राजा ने उस शाखा को परखा जिस पर वह बैठा था कि क्या वह उसका भार सहन कर सकती है ? परंतु जब उसने शाखा की लंबाई देखी तो वह और घबरा गया क्योंकि जहां से वह शाखा निकलती है वहां एक सफेद और एक काला चूहा शाखा को कुतर रहे हैं | डर के मारे राजा सोचने लगा कि अब मैं क्या करूं ? अब मैं बुरी तरह से फंस गया हूं और निकलने का कोई रास्ता नहीं है |

सोचने लगा कि अगर नीचे उतरकर भागता हूं तो शेर खाता है, अगर बैठा रहूं तो चूहे टहनी काट रहे हैं, आखिर नीचे गिर जाऊंगा | फिर नीचे देखता है कि अगर टहनी टूट गए और नीचे गिरा तो वहां की जगह पक्की है या कच्ची, तभी एक भयानक दृश्य देखकर वह कांप उठता है | शेर के पास ही एक अजगर अपना मुंह खोले बैठा हुआ है कि यह नीचे गिरे और इसे खाऊं | बड़ा परेशान हुआ कि किसी तरह से भी छुटकारा नहीं है, ना बैठे रहने से न नीचे उतर कर भाग निकलने में ! जब वह पहने को पकड़े इस सोच में डूबा हुआ था कि वह अपने आप को कैसे बचाए तो अचानक उसने देखा कि ऊपर एक शाखा पर लगे मधुमक्खी के छत्ते से शहद टपक रहा है | वह उसे चाटने लग गया | शहद के आनंद में वह ऐसा मस्त हो गया कि ना शेर का डर रहा, न अजगर का और न ही चूहों का ख्याल रहा |

कुछ समय बाद चूहों ने टहनी को कुतर डाला | टहनी टूट कर नीचे गिर गई | शहद के आनंद में मगन राजा मारा गया |
अब इस कहानी में बादशाह कौन है ? वह हम हैं | हम उम्र की दौलत लेकर यहां आए हैं | यह जो हमारा शरीर है किराए का मकान है और एक दिन इसे खाली करना है | शेर काल है जो हमारी और देख रहा है यानी काल या धर्मराज के दूत पल पल का हिसाब कर रहे हैं कि इसके इतने दिन, इतने घंटे, इतने मिनट बाकी हैं | काला चूहा और सफेद चूहा दिन और रात हैं, जो हमारे जीवन के पेड़ को काट रहे हैं | जो दिन आज चला गया उसे कल नहीं आना है | बाकी रहा अजगर, वह चिता या कब्र है जो मुंह खोले देख रही है कि कब यह आए और कब इसको हड़प लूं |

कब्र कहती है तुझे जब आना है मेरे पास ही आना है, फिर मरने का क्या डर ? दुनिया के भोग विलास शहद हैं, में हम इतने डूबे हुए बैठे हैं कि ऐसी खौफनाक चीजों से घिरे होने पर भी नहीं डरते, बल्कि कहते हैं कल किसने देखा |

जो हमें चाहिए कि इंद्रियों के भोगों में खोए देने की बजाय परमात्मा की खोज में लगे मनुष्य जन्म पूरा फायदा उठाएं |

दोस्तों मनुष्य जीवन का यही रहस्य है, और यही मनुष्य जीवन का उद्देश्य है| अगर आप कोई अच्छा लगा हो तो कृपया आगे जरुर शेयर करें

धन्यवाद

Originally published at https://www.spiritualstories.online.

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